Nov 3, 2025

'रोई रोई बिनाले' की लहर: ऐतिहासिक प्रदर्शन



 

🎬 'रोई रोई बिनाले': जुबीन गर्ग की आखिरी विदाई जो पूरे असम को रुला गई यह सिर्फ फिल्म नहीं, एक आखिरी श्रद्धांजलि है!

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         ✍️ एक भावनात्मक सुनामी

आज सिनेमाघरों में जो हो रहा है, वह केवल एक फिल्म की रिलीज़ नहीं हैयह एक सांस्कृतिक सुनामी है, एक अटूट प्रेम की कहानी है जुबीन गर्ग, वह नाम जिसने असम की संगीत और सिनेमाई दुनिया को एक नया आयाम दिया, उनकी अंतिम कृति 'रोई रोई बिनाले' ने रिलीज़ होते ही पूरे देश में हलचल मचा दी है। उनकी आकस्मिक मृत्यु के बाद परदे पर जुबीन दा की अंतिम उपस्थिति देखना फैंस के लिए सिर्फ एक सिनेमाई अनुभव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक catharsis (भाव-विरेचन) बन गया है असम के सिनेमाघरों के बाहर, जहाँ सुबह 4 बजे से लोग कतारों में खड़े थे, वहाँ यह साफ दिखाई दिया कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ने नहीं आई है, बल्कि यह अपने लीजेंड को एक सामूहिक श्रद्धांजलि देने आई है। तो क्या है जुबीन गर्ग की इस 19 साल पुरानी ड्रीम प्रोजेक्ट की कहानी? कैसे एक क्षेत्रीय फिल्म ने पूरे भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई? और क्यों दर्शक थिएटर से बाहर निकलते हुए खुशी से नहीं, बल्कि आंसुओं के साथ बाहर रहे हैं? आइए, जानते हैं इस ऐतिहासिक फिल्म का राज्य-वार और अखिल भारतीय रिव्यू


🌟 असम में 'रोई रोई बिनाले' की लहर: ऐतिहासिक प्रदर्शन

'रोई रोई बिनाले' की रिलीज़ ने साबित कर दिया कि असम के लोगों के लिए जुबीन गर्ग सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक भावना थे फिल्म की रिलीज़ किसी त्योहार से कम नहीं थी, जिसने स्थानीय बॉक्स ऑफिस के इतिहास को फिर से लिख दिया है:

    • अभूतपूर्व क्रेज: असम के कई शहरों में, जुबीन दा के फैंस सुबह 4 बजे से पहले ही सिनेमाघरों के बाहर जमा हो गए टिकटों की मांग इतनी थी कि कई जगहों पर सुबह के शो 4:30 AM से शुरू करने पड़ेअसमिया सिनेमा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है

    • 100% ऑक्यूपेंसी: पहले वीकेंड में, राज्य भर के थिएटरों ने लगभग 100% ऑक्यूपेंसी दर्ज की आलम यह था कि पहले हफ्ते के लिए सभी टिकटें रिकॉर्ड समय में बिक गईं, जिसके कारण सिनेमाघरों को अस्थायी रूप से अन्य फिल्मों को हटाकर केवल 'रोई रोई बिनाले' के शो चलाने पड़े
    • रिकॉर्ड तोड़ कमाई: फिल्म ने अपने पहले दिन ही ₹1.9 करोड़ से ₹2.52 करोड़ (नेट) की ओपनिंग के साथ असमिया सिनेमा का सबसे बड़ा ओपनिंग रिकॉर्ड बनाया पहले वीकेंड (3 दिन) में ही यह कलेक्शन ₹6 करोड़ से अधिक हो गया, और अनुमान है कि इसका लाइफटाइम कलेक्शन ₹30-50 करोड़ तक जा सकता है, जो एक नया कीर्तिमान होगा
    • फिल्म की कहानी और जुबीन का अभिनय: फिल्म में जुबीन गर्ग ने एक दृष्टिहीन संगीतकार का किरदार निभाया है फिल्म उनके जीवन, संघर्ष और संगीत के जुनून को दर्शाती है, जिसे जुबीन दा ने बड़ी संजीदगी से निभाया है हॉल से बाहर निकलने वाले दर्शकों की भावुक प्रतिक्रिया ही फिल्म की सबसे बड़ी समीक्षा है

        💬 जुबीन गर्ग के चुनिंदा संवाद (Dialogues): कलाकार की आवाज


                फिल्म का सबसे शक्तिशाली पक्ष जुबीन गर्ग द्वारा निभाए गए किरदार 'राहुल' के संवाद हैं,                 जो जुबीन दा के वास्तविक जीवन के व्यक्तित्व और सामाजिक-राजनीतिक विचारों                             को दर्शाते हैं। ये पंक्तियाँ दर्शकों को सिर्फ मनोरंजन नहीं देतीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करती             हैं: 

                  "Moi andha nohoi, I am an artist.""मैं अंधा नहीं हूँ, मैं एक               कलाकार हूँ।"जुबीन गर्ग के किरदार (राहुल) की आत्म-पहचान। यह दिखाता         है कि कला उन्हें किसी भी शारीरिक कमी से ऊपर रखती है।

        "Artist rojar logot nohoi xhodai raijor logot thakibo                         lage.""कलाकार को राजा के साथ नहीं, हमेशा जनता के साथ रहना             चाहिए।"जुबीन दा के सामाजिक-वामपंथी विचारों का सार। यह कलाकार की             ज़िम्मेदारी को दर्शाता है।

        "Gakhiror bepariu bepari ganor bepariu bepari, lage matra                 toka." "दूध बेचने वाला भी व्यापारी है और गाना बेचने वाला भी,                 चाहिए बस पैसा।"यह कला के व्यावसायीकरण (Commercialization of             Art) पर एक तीखा कटाक्ष है।

        "MLA xhokolok sir buli kio matibo lage, hihoty aamak ki                 xhikai ? June val xhikha diye teuk hai sir buli matibo                       lage.""MLA लोगों को 'सर' क्यों कहना चाहिए, वे हमें क्या सिखाते                हैं? जो अच्छी सीख देता है, उसे 'सर' कहना चाहिए।"सिस्टम और सत्ता           के प्रति जुबीन गर्ग की विद्रोही भावना को दर्शाता हुआ एक शक्तिशाली                   संवाद।

        Xhagor khan bahut dangor, xhaturibo parimne ? "समुद्र सचमुच            विशाल है। क्या मैं तैर पाऊंगा?"यह संवाद विशेष रूप से भावनात्मक है,             क्योंकि जुबीन गर्ग का निधन समुद्र में तैरते समय ही हुआ था, जो दर्शकों में             एक गहरी त्रासदीपूर्ण भावना जगाता है।



    
अखिल भारतीय प्रभाव: क्षेत्रीय सिनेमा की नई उड़ान

जुबीन गर्ग की पैन-इंडिया लोकप्रियता के कारण 'रोई रोई बिनाले' की रिलीज़ सिर्फ असम तक सीमित नहीं रही:

    • सबसे बड़ी रिलीज़: यह फिल्म पूरे भारत में 90 से अधिक स्क्रीन्स पर रिलीज़ हुई, जिसमें मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, भुवनेश्वर और जयपुर जैसे प्रमुख गैर-पूर्वोत्तर शहर शामिल थे किसी असमिया फिल्म के लिए इतनी व्यापक राष्ट्रीय रिलीज़ मिलना अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण है
    • समीक्षकों की राय: राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षकों ने जुबीन गर्ग के अभिनय की सराहना की है फिल्म को एक म्यूजिकल ड्रामा के रूप में सराहा गया है जिसमें 11 गाने हैं, जो जुबीन गर्ग के संगीत कौशल को दर्शाते हैं भले ही कुछ समीक्षकों ने दूसरे हाफ को थोड़ा धीमा बताया है, लेकिन जुबीन की अद्वितीय उपस्थिति और फिल्म के ईमानदार प्रयास ने इस बात को दरकिनार कर दिया है
    • विरासत को सम्मान: यह फिल्म उनके फैंस के लिए उनके 19 साल पुराने सपने का साकार होना है जुबीन दा ने इस परियोजना में एक अभिनेता, संगीतकार और सह-निर्माता के रूप में गहराई से योगदान दिया था अंततः, 'रोई रोई बिनाले' सिनेमा से परे जाकर जुबीन गर्ग की अमर कला और विरासत का जश्न बन गई है


🛑 समापन और फैसला: एक लीजेंड की अमर विरासत

'रोई रोई बिनाले' केवल जुबीन गर्ग की आखिरी फिल्म नहीं है; यह उनके प्रशंसकों के अटूट प्रेम और असमिया सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है जिस तरह से पूरे भारत में लोगों ने सुबह 4 बजे कतारों में लगकर अपने प्रिय कलाकार को अंतिम सम्मान दिया है, वह साबित करता है कि जुबीन दा की आवाज़ और कला की गूँज हमेशा अमर रहेगी

यह एक ऐसी फिल्म है जिसने रिकॉर्ड तोड़े, दिलों को छुआ, और एक पूरे समुदाय को एक साथ रोने और जश्न मनाने का मौका दिया भले ही कहानी में कुछ कमियाँ हों, लेकिन जुबीन गर्ग का ईमानदार और मार्मिक अभिनय इसे एक ज़रूरी वॉच बनाता है यह फिल्म एक कलाकार के जुनून, उनके संघर्ष और उनके संगीत के प्रति समर्पण का अंतिम प्रमाण है 'रोई रोई बिनाले' के माध्यम से जुबीन गर्ग हमेशा के लिए हमारे दिलों और असमिया सिनेमा के इतिहास में अमर हो गए हैं



"क्या आपने 'रोई रोई बिनाले' देखी है? थिएटर में आपका अनुभव कैसा रहा? नीचे कमेंट करके हमें बताएं कि जुबीन गर्ग के कौन से दृश्य ने आपको सबसे ज्यादा भावुक किया!"

 


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